हनुमान जी की शारीरिक ऊंचाई: पौराणिक रहस्य और आध्यात्मिक महत्व
हनुमान जी का नाम लेते ही हमारे मन में वीरता, भक्ति और अपार शक्ति की छवि बन जाती है। वह न केवल राम भक्तों के आराध्य हैं, बल्कि पूरी दुनिया में साहस और निष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं।
लेकिन एक सवाल हमेशा भक्तों के मन में आता है – हनुमान जी की ऊंचाई (Height of Hanuman Ji) आखिर कितनी थी? क्या उनकी कोई निश्चित लंबाई थी या फिर वे इच्छा अनुसार अपना रूप बदल सकते थे?
आइए, इस रहस्य को पौराणिक ग्रंथों और आधुनिक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश करते हैं।
हनुमान जी की ऊंचाई: पौराणिक मान्यताएँ
रामचरितमानस और रामायण में हनुमान जी की ऊंचाई को लेकर कई रोचक प्रसंग मिलते हैं।
हनुमान चालीसा की एक चौपाई है:
“सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक जरावा।”
इसका मतलब है कि हनुमान जी अपनी ऊंचाई और रूप को मनमुताबिक छोटा या विशाल कर सकते थे।
- जब अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन किए, तब वे छोटे रूप में गए ताकि कोई उन्हें पहचान न सके।
- और जब लंका को जलाना था, तो उन्होंने इतना विराट रूप धारण किया कि पूरा नगर काँप उठा।
यानी उनकी ऊंचाई किसी “मीटर या फीट” से नहीं मापी जा सकती।
वाल्मीकि रामायण से उदाहरण
रामायण में वर्णन मिलता है कि बचपन में हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की। उस समय उनका रूप इतना विशाल हो गया कि देवता भी आश्चर्यचकित रह गए।
यहीं से यह साफ होता है कि उनकी ऊंचाई सीमित नहीं थी, बल्कि वे समय और परिस्थिति के अनुसार उसे बदलते थे।

आधुनिक समय में हनुमान जी की ऊंचाई
भक्तों की आस्था और श्रद्धा को दर्शाने के लिए आज भारत और विदेशों में हनुमान जी की कई भव्य मूर्तियाँ बनाई गई हैं। इन मूर्तियों को देखकर लगता है मानो उनकी विराट शक्ति मूर्त रूप में सामने खड़ी हो।
कुछ प्रसिद्ध मूर्तियाँ:
- मदपम हनुमान मूर्ति (आंध्र प्रदेश) – 176 फीट ऊंची, भारत की सबसे विशाल हनुमान प्रतिमा।
- जाखू हनुमान मूर्ति (शिमला) – 108 फीट ऊंची, शिमला की पहचान बन चुकी है।
- हनुमत धाम (शाहजहाँपुर) – 130 फीट ऊंची मूर्ति, नदी के बीच स्थित।
- फरीदाबाद हनुमान मूर्ति (हरियाणा) – 101 फीट, एशिया की सबसे ऊंची बैठी हुई मूर्ति।
- पंचमुखी हनुमान (कर्नाटक) – 161 फीट, पंचमुखी स्वरूप में स्थापित।
ये मूर्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हनुमान जी की महानता को “नापना” असंभव है।
हनुमान जी की ऊंचाई का आध्यात्मिक अर्थ
असल में हनुमान जी की ऊंचाई सिर्फ शरीर की लंबाई नहीं, बल्कि उनकी भक्ति, निष्ठा और साहस का प्रतीक है।
- उनकी शक्ति हमें बताती है कि सच्ची ऊंचाई शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक होती है।
- उनकी विनम्रता और सेवा भावना ही उन्हें “सबसे ऊंचा” बनाती है।
- आज भी उन्हें “चिरंजीवी” माना जाता है यानी उनकी उपस्थिति हर युग में बनी रहती है।
तो अब जब भी आपके मन में सवाल आए – “हनुमान जी की ऊंचाई कितनी थी?”, तो याद रखिए, उनकी ऊंचाई किसी फीट या मीटर में नहीं, बल्कि उनकी भक्ति, शक्ति और साहस में निहित है।
कभी वे सूक्ष्म होकर माता सीता के पास पहुँचे, तो कभी विराट होकर पूरी लंका हिला दी।
और आज उनकी विशाल मूर्तियाँ हमें यही संदेश देती हैं – कि इंसान की असली ऊंचाई उसकी निष्ठा और सेवा भावना से तय होती है।
🙏 जय श्री राम!
🙏 जय बजरंगबली!
