Kal Chaudhvin Ki Raat Thi Lyrics | कल चौदहवीं की रात थी – Complete Ghazal
Kal Chaudhvin Ki Raat Thi / कल चौदहवीं की रात थी is one of the most celebrated Urdu ghazals in South Asian literary history. Known for its intense romantic imagery, moonlit symbolism, and classical elegance, this ghazal has remained timeless across generations.
This article presents the complete lyrics, Hindi–Urdu text, simple meaning, and literary context, making it a reliable and authoritative resource for readers, students, and poetry lovers.
🔍 Quick Overview (For Featured Snippet)
- Title: Kal Chaudhvin Ki Raat Thi
- Genre: Classical Urdu Ghazal
- Theme: Love, separation, beauty, longing
- Language: Urdu (with Hindi transliteration)
- Poetic Style: Romantic symbolism, lunar imagery
✍️ कल चौदहवीं की रात थी – हिंदी में
Kal chaudhvin ki raat thi/ कल चौदहवीं की रात थी
कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा
(शब = रात)
हम भी वहीं मौजूद थे, हम से भी सब पूछा किए
हम हँस दिए, हम चुप रहे, मंजूर था परदा तेरा
इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महिफ़लें
हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा
कूचे को तेरे छोड़ कर जोगी ही बन जाएँ मगर
जंगल तेरे, पर्वत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा

(कूचा = गली), (सहरा = रेगिस्तान)
बेदर्द, सुननी हो तो चल, कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल
आशिक़ तेरा, रुसवा तेरा, शायर तेरा, ‘इन्शा’ तेरा
(रुसवा = अपमानित, बदनाम)
-इब्ने इन्शा
इसी ग़ज़ल के कुछ और अश’आर:
तू बेवफ़ा तू मेहरबाँ हम और तुझ से बद-गुमाँ
हम ने तो पूछा था ज़रा ये वक्त क्यूँ ठहरा तेरा
हम पर ये सख़्ती की नज़र हम हैं फ़क़ीर-ए-रहगुज़र
रस्ता कभी रोका तेरा दामन कभी थामा तेरा
दो अश्क जाने किस लिए, पलकों पे आ कर टिक गए
अल्ताफ़ की बारिश तेरी अक्राम का दरिया तेरा
(अल्ताफ़ = दयाएँ, कृपाएँ, मेहरबानियाँ),
(अक्राम = करम का बहुवचन, दान, भेंटें)
हाँ हाँ, तेरी सूरत हँसी, लेकिन तू ऐसा भी नहीं
इस शख़्स के अश’आर से, शोहरा हुआ क्या-क्या तेरा
(शोहरा = शोहरत, प्रसिद्धि, ख्याति)
बेशक, उसी का दोष है, कहता नहीं ख़ामोश है
तू आप कर ऐसी दवा बीमार हो अच्छा तेरा
📖 Simple Meaning (आसान अर्थ)
यह ग़ज़ल प्रेमिका की सुंदरता को पूर्णिमा के चाँद से तुलना करती है। कवि बताता है कि पूरी रात केवल उसी का ज़िक्र था।
कुछ लोगों ने उसे चाँद कहा, कुछ ने उसका चेहरा।
कवि स्वयं भी वहाँ था, लेकिन प्रेम की पवित्रता बनाए रखने के लिए मौन रहा।
यह कविता मौन प्रेम, सम्मान, और आंतरिक भावनाओं की गहराई को दर्शाती है।
🎭 Literary Analysis
1. Chaudhvin Ka Chand (चौदहवीं का चाँद)
Urdu poetry में चौदहवीं का चाँद पूर्ण सौंदर्य और अतुलनीय आकर्षण का प्रतीक है।
2. Parda (परदा)
यहाँ “परदा” केवल सामाजिक नहीं, बल्कि भावनात्मक गरिमा और प्रेम की मर्यादा का संकेत है।
3. Collective Admiration
पूरा शहर प्रेमिका के सौंदर्य से मोहित है, जिससे प्रेम व्यक्तिगत न रहकर सार्वभौमिक बन जाता है।
❤️ Why This Ghazal Is Still Popular
- शास्त्रीय उर्दू सौंदर्य
- सरल लेकिन गहरी भावनाएँ
- संगीत, कव्वाली और मंचीय पाठ में लोकप्रिय
- हर पीढ़ी से जुड़ने वाला भाव
📌 Frequently Asked Questions (FAQ – SEO Boost)
❓ Kal Chaudhvin Ki Raat Thi kisne likhi?
यह एक प्रसिद्ध शास्त्रीय उर्दू ग़ज़ल है, जिसे आमतौर पर अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र से जोड़ा जाता है।
❓ इस ग़ज़ल का मुख्य भाव क्या है?
प्रेम, सौंदर्य, मौन सम्मान और भावनात्मक गहराई।
❓ क्या यह ग़ज़ल गाने में प्रयोग होती है?
हाँ, इसे कई गायकों और कव्वालों ने मंच पर प्रस्तुत किया है।
🏁 Conclusion
Kal Chaudhvin Ki Raat Thi / कल चौदहवीं की रात थी केवल एक ग़ज़ल नहीं, बल्कि उर्दू साहित्य की आत्मा है।
इसकी पंक्तियाँ आज भी उतनी ही जीवंत हैं, जितनी रचनाकाल में थीं।
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