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धुन तेरे नाम की

Alzheimer Love Novel

📝 अध्याय 1: टूटी हुई ताल

“संगीत वो भाषा है, जिसे दिल तो समझता है, मगर दिमाग कई बार इनकार कर देता है…”

मुंबई की उमस भरी दोपहर में जब हर कोई अपने घरों की ठंडी दीवारों में सिमट रहा था, तब एक 26 वर्षीय लड़का अपने स्टूडियो में गिटार के तारों को गुस्से से झकझोर रहा था।
उसका नाम था नील भट्ट

काले टीशर्ट, बिखरे बाल, और आंखों में बुझी हुई आग — यही उसकी पहचान थी।
नील को इस शहर ने बहुत कुछ सिखाया था: सपने देखना, सपनों के लिए लड़ना, और सपनों के टूटने पर रोना।

लेकिन वो रोता नहीं था।
वो गाता था।

आज का दिन भी कोई अलग नहीं था। रिकॉर्डिंग स्टूडियो के अंदर भरे तनाव के माहौल में, नील का एक और सॉन्ग प्रोड्यूसर ने ठुकरा दिया था।

“ये बहुत इमोशनल है, नील। लोग डांस करना चाहते हैं, रोना नहीं।”

नील ने कोई जवाब नहीं दिया। सिर्फ एक गहरी सांस ली और बाहर निकल गया — जहां भीड़ थी, शोर था, और एक गिरी हुई डायरी उसका इंतज़ार कर रही थी।

📝 अध्याय 2: एक गिरी हुई डायरी

नील की चाल तेज़ थी, लेकिन मन अंदर से खाली।
सड़क पर निकलते ही उसने जेब से हेडफोन निकाला और वही पुराना अधूरा सॉन्ग चला दिया —
“तेरा नाम बोलूं तो दिल थम सा जाता है…”

सड़क किनारे सब कुछ वैसा ही था — पान की दुकानें, रिक्शा वाले, ट्रैफिक का शोर… और फिर कुछ अलग दिखा।

एक पुरानी, लाल रंग की डायरी… मिट्टी से सनी हुई… जैसे उसे गिराकर कोई भागा हो।

नील रुक गया।

उसने डायरी उठाई — कवर पर एक नाम लिखा था, हल्के अक्षरों में…

“तृषा मेहरा”

नील ने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई नज़र नहीं आया जो इसे खोज रहा हो।

हिचकिचाते हुए, उसने पहला पन्ना खोला।


“ज़िंदगी जब टूटती है, तो आवाज़ नहीं करती।
लेकिन जो टूटी आवाज़ें बनाती हैं, वो कभी-कभी गीत बन जाती हैं…”

नील का दिल जैसे कुछ पल के लिए थम गया।

पन्ना-दर-पन्ना उसने पढ़ना शुरू किया।

“मैं तृषा हूं। और शायद अब वो नहीं रही जो हुआ करती थी।
जिसे मैं प्यार कहती थी, उसने मेरी चुप्पियों से डरकर मेरा हाथ छोड़ दिया…
मेरी कविता आज पहली बार डर रही है, शायद मैं भी।”

हर लाइन जैसे नील के अंदर कुछ खोल रही थी।

उसे किसी लड़की की आवाज़ सुनाई दे रही थी — नाजुक, टूटी, लेकिन गहरी।
जैसे दर्द के अंदर भी कोई संगीत बसता हो।


ये लड़की कौन है?” नील ने बुदबुदाते हुए डायरी बंद की।

उसी वक्त पास की बेंच पर बैठी एक वृद्धा ने कहा,

“वो लड़की अभी-अभी रोते हुए भागी थी… डायरी शायद उसी की हो।”

नील का दिल बेचैन हो गया।

किधर गईं वो?

“बस की तरफ…”

नील बिना सोचे दौड़ पड़ा। जैसे उसे उस आवाज़ से मिलना ज़रूरी हो गया हो।


🚏 अगला दृश्य:

नील बस स्टॉप पर पहुंचता है।
तृषा अब भी वहां खड़ी है, पीली दुपट्टे में, आंखें लाल और होंठ कांपते हुए।

वो डायरी के बिना अधूरी लग रही थी।

नील धीमे क़दमों से उसके पास गया।
“तृषा मेहरा?”

वो चौंकी, पलटी।
उसने उसे कभी नहीं देखा था।

नील ने डायरी आगे बढ़ाई —

“ये… गिर गई थी शायद। लेकिन ये सिर्फ डायरी नहीं है… ये एक कविता की आत्मा है।”

तृषा ने डायरी ली, और एक पल के लिए नील की आंखों में देखा।

“आपने… पढ़ा?”

नील मुस्कुराया —

“हर एक शब्द… और कुछ महसूस किया जो कभी अपने ही गानों में नहीं मिला था।”

तृषा के होंठ थरथराए।
“मैं अब नहीं लिखती।”

“पर तुम अब भी महसूस करती हो… और वही काफी है।”

यह मुलाक़ात मामूली नहीं थी।
यह शुरुआत थी… एक ऐसी यात्रा की, जो दिल से होकर रूह तक जाएगी।

📝 अध्याय 3: साज़ और स्याही

“कुछ रिश्ते बोलने से नहीं, बस सुनने से बनते हैं… और वो भी तब, जब एक दिल साज़ बजाए और दूसरा स्याही में बह जाए।”

तृषा और नील की दूसरी मुलाक़ात उनके पहली जैसी नहीं थी।

इस बार बारिश हो रही थी।

नील ने उसे एक छोटी सी चाय की दुकान पर बुलाया — वही जगह जहाँ वो अकसर अपने अधूरे गानों को कॉफी के साथ मिलाकर परखता था।

तृषा आई, लेकिन संकोच में डूबी हुई।

“मैंने पहले ही कहा था, मैं अब नहीं लिखती।”

नील ने एक पुराना गिटार उठाया, दो कॉर्ड बजाए और बोला —

“शब्दों को मत लिखो… बस बोल दो। मैं उन्हें सुर दे दूँगा।”

तृषा हँसी — पहली बार।

“शब्दों से दोस्ती नहीं रही अब…”

“तो चलो दुबारा मिलवा दूं,” नील ने धीरे से कहा।


🎵 गानों की शुरुआत

स्टूडियो में उनकी पहली मुलाकात अजीब थी।

नील ने एक बेसिक मेलोडी कंपोज़ की थी — अधूरी, लेकिन दिल को छूने वाली।
उसने तृषा को एक हेडफोन पहनाया, और खुद गिटार उठाया।

“तू है… कहीं पास या दूर…
धड़कनों की तरह, महसूस तो होता है…”

तृषा की आंखें भर आईं।

उसने पहली बार एक लाइन अपनी डायरी से निकाली और बोली —

“बातें जो लफ्ज़ों से न निकले, वो धड़कनों में छिप जाती हैं…”

नील रुक गया। उसने तुरंत नोट किया।

“बस यही चाहिए मुझे… ऐसे ही कुछ और दो…”


🌙 कहानी गहराती है

अगले कुछ हफ्तों में, तृषा और नील के बीच एक अजीब-सी सहजता पनपने लगी।

  • वो कभी साउंडबूथ में लड़ते थे —
    “ये लाइन बहुत ओवर है”, नील कहता।
    “और तुम्हारा कॉर्ड क्या है? दिल तोड़ने वाला?” तृषा पलटती।
  • तो कभी एक-दूसरे की चुप्पियों में मुस्कुराते।
    नील जब गाता, तृषा बिना बोले सुनती।
    और जब तृषा डायरी में लिखती, नील हर शब्द को सुर की तरह टटोलता।

एक दिन, नील ने पूछा —

“तृषा… तुमने कब आखिरी बार खुद को माफ़ किया था?”

वो चौंकी।

“मैंने कभी कोशिश नहीं की…”

“शुरुआत करो। इस गाने से।”


🎶 “पहला गीत”

आखिरकार, उनका पहला गाना तैयार हुआ।
नाम था: “तू कहीं है”
एक प्रेमगीत, जो अधूरेपन को भी खूबसूरत बना दे।

गाने की कुछ पंक्तियाँ:

“तू कहीं है इन हवाओं में
या शायद मेरी तन्हाइयों में…
जो भी है, अधूरा सा है,
फिर भी पूरा लगता है…”

जब ये गाना ऑनलाइन आया, तो लोगों ने इसे “रूह से निकली धुन” कहा।

तृषा ने वो कमेंट पढ़े और मुस्कुराई — बहुत दिनों बाद।

🌌 अध्याय का समापन

एक शाम तृषा और नील, समंदर किनारे बैठे थे।

नील ने धीमे से कहा —

“तुम्हारी कविताएं, मुझे संगीत से मिलवा रही हैं।
और शायद… तुम्हारे ज़रिए मैं खुद से भी मिल रहा हूँ।”

तृषा ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस एक पंक्ति डायरी में लिख दी —

“शब्दों ने सुरों को अपनाया है… शायद मैं भी फिर से जीने लगी हूं।”

📝 अध्याय 4: साए अतीत के

“जो बीत गया, वो बीता नहीं… वो साथ चलता है, साँसों की तरह… अदृश्य, लेकिन ज़िंदा।”

स्टूडियो की उस खिड़की से समुद्र की लहरें दिखती थीं।
लेकिन आज तृषा के लिए लहरें शांत नहीं थीं — वो किसी तूफान की याद दिला रही थीं।

नील उसे चुपचाप देख रहा था — वो आज कुछ अलग सी लग रही थी।
डायरी उसके हाथ में थी, लेकिन खुली नहीं।
जैसे वो किसी पुराने पन्ने को छूने से डर रही हो।

“कुछ कहना चाहोगी?” नील ने पूछा।

तृषा ने गहरी सांस ली।
“तुम्हें मालूम है… कभी किसी ने मेरे लिए शादी का मंडप छोड़ दिया था?”


💔 फ्लैशबैक — दो साल पहले

दिल्ली। सर्दियों की शादी।
तृषा, लाल जोड़े में, सपनों से भरी हुई।

और सामने खड़ा था विवान सेन — एक नामी एंटरप्रेन्योर, चार्मिंग, और आत्मविश्वासी।
दोनों की सगाई एक साल पहले हुई थी।

शादी के दिन, जब सब पंडाल में इंतज़ार कर रहे थे…
विवान का एक मेसेज आया:

“I can’t do this. I’m not ready. I’m sorry, Trisha.”

तृषा के हाथ से फूल गिर गए।
उसके पांव से आवाज़ गायब हो गई।


🕯️ वापस वर्तमान में

“शायद मैं ही बहुत ज्यादा उम्मीद कर बैठी थी…”
“या शायद वो बस कायर था।” नील ने कहा।

तृषा की आंखें नम हो गईं।

“उस दिन के बाद मैंने कलम छूनी तक नहीं…
जो शब्द मेरी ताकत थे, अब मेरा डर बन गए थे।”

नील ने उसकी ओर देखा, और पहली बार उसके चेहरे पर दर्द नहीं, बल्कि हिम्मत दिखाई दी।

“तुमने तब भी लिखा। अपनी डायरी में।
शब्द कहीं नहीं गए थे… बस तुमने उन्हें अकेला छोड़ दिया था।”


📻 एक और झटका

अगले दिन, नील जब स्टूडियो में पहुंचा, तृषा पहले से वहां थी।
हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी —
विवान की… जो अब एक बड़ा मीडिया चेहरा बन चुका था।

“कल उसने मेसेज किया है,” तृषा ने कहा।

नील की आंखों में हल्की चिंगारी उभरी।
“क्या कहा उसने?”

“माफ़ी… और एक कॉफ़ी पर मिलने का न्योता।”

नील चुप हो गया।
फिर पूछा —

“तुम जाओगी?”

तृषा बोली —

“नहीं पता… शायद जवाब पाने की भूख अभी भी बाकी है।”

नील ने धीरे से कहा —

“अगर तुम जाओ… तो खुद के लिए जाना, उसके लिए नहीं।”


🌙 अध्याय का अंत

रात को तृषा ने डायरी में लिखा:

“विवान ने मेरा दिल तोड़ा था…
लेकिन शायद, नील मुझे जोड़ रहा है।
मैं अब सिर्फ शब्द नहीं लिखना चाहती,
मैं जीना चाहती हूं — सुरों के साथ।”

📝 अध्याय 5: धड़कनों की धुन

“जब दो टूटे लोग एक सुर में सांस लेते हैं, तो संगीत सिर्फ ध्वनि नहीं रहता — वो इम्तहान बन जाता है… और कभी-कभी, एक वादा।”


🎤 पहला ऑफर

मुंबई के एक इंडी म्यूजिक फेस्टिवल ने नील को बुलाया था।
“एक नया जोड़ा, एक नई आवाज़” — यही थी थीम।

नील को तुरंत तृषा का ख्याल आया।

“मुझे नहीं लगता मैं मंच के लायक हूं,” तृषा ने कहा।

नील मुस्कराया।

“शब्द तुम्हारे हैं, धुन मेरी।
अगर डर को हराना है, तो एक साथ करना होगा।”


🎵 गाने की तैयारी

नील और तृषा स्टूडियो में देर रात तक एक नया गाना बना रहे थे।

गाने का नाम था: “मुझमें कहीं तुम”

नील गिटार पर बेस लाइन बजाता, और तृषा उसकी धुन पर थिरकती कविता कहती —

“मेरी सांसों की रागिनी में,
कोई नाम सा तू बसा है…
मैं जब भी खुद को देखूं,
तेरा अक्स ही दिखता है…”

नील एक पल के लिए उसे देखता रहा —
उसकी आंखों में पहली बार डर की जगह भरोसा था।

“ये गाना नहीं, तृषा… ये हमारी कहानी है।”


🌃 कॉन्सर्ट की रात

जगह: बांद्रा ओपन थिएटर
रात, हल्की बारिश, रोशनी की झालरें… और एक हज़ार लोग।

तृषा की हथेली कांप रही थी।
नील ने उसका हाथ थामा।

“तुम मेरी आवाज़ हो… अगर तुम नहीं गाओगी, मैं भी नहीं गाऊंगा।”

तृषा ने सिर हिलाया —

“आज नहीं… आज हम दोनों गाएंगे।”


🎶 परफॉर्मेंस

गाना शुरू हुआ।

नील की आवाज़ गूंजने लगी —

“तेरे बिना ये जो लम्हें हैं, अधूरे हैं…”

फिर तृषा की आवाज़ उभरी —
धीमी, लेकिन सच्ची।

“तू मिले तो लगता है, सब कुछ मेरे पास है…”

स्टेज पर खड़े दो लोग, जिनका अतीत टूटा था,
आज साथ मिलकर एक नयी शुरुआत गा रहे थे।

लोग तालियां बजा रहे थे।
लेकिन तृषा की आंखें सिर्फ नील पर थीं।

गाने के अंत में, नील ने अचानक स्टेज पर कहा —

“तृषा…
मैं नहीं जानता कल क्या होगा,
लेकिन आज मैं ये जानता हूं —
तुम्हारे शब्दों के बिना, मेरी धुनें अधूरी हैं।
क्या तुम हमेशा मेरे साथ गाओगी… जिंदगी भर?”

तृषा की आंखें भर आईं।

“हाँ…”


अध्याय का अंत

कॉन्सर्ट के बाद नील और तृषा समुद्र के किनारे खामोशी से बैठे थे।

तृषा ने धीरे से कहा —

“ये धड़कनें अब डर नहीं रही… शायद अब जी रही हैं।”

नील ने जवाब नहीं दिया।

उसने बस गिटार उठाया… और पहली बार बिना बोले सिर्फ उसके लिए कुछ बजाया।

📝 अध्याय 6: भूले पलों की बारिश

“कभी-कभी, जो याद रहता है वो दर्द होता है… और जो भूल जाता है, वो प्यार।”


🌧️ पहला संकेत

तृषा और नील की ज़िंदगी में सबकुछ ठीक लग रहा था।

गाने हिट हो रहे थे, इंटरव्यूज़ आ रहे थे, और फैंस अब उन्हें “सायरा एंड नील” कहने लगे थे — उनके डुएट गाने के नाम पर।

एक दिन तृषा स्टूडियो पहुंची।
वो हँसी, लेकिन आंखें खाली थीं।

नील ने पूछा,

“लिरिक्स लाईं?”

तृषा ने डायरी खोली…
और एकदम चौंकी।

“ये मैंने लिखा था…?”

उसकी उंगलियाँ कांप रही थीं।
नील ने हल्के से कहा —

“हाँ, तुमने ही… पर कोई बात नहीं, शायद थक गई हो।”


📅 घटनाएँ बढ़ती हैं

कुछ दिनों बाद, नील उसे लेने गया।

तृषा ने पूछा —

“आज हमारी मुलाक़ात है क्या?”

नील चौंका —

“हम साथ ही रहते हैं, तृषा…”

वो झेंप गई।
हँसी में छुपा लिया।

लेकिन नील की आंखों में सवाल उभर चुके थे।


🧠 डॉक्टर की रिपोर्ट

नील ने तृषा से छुपकर डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लिया।

तृषा जांच में गई, और बाहर आने पर बोली —

“बस कुछ स्ट्रेस है, कुछ नहीं…”

लेकिन शाम को जब नील को मेल आया, वो सन्न रह गया।

निदान: Early-Onset Alzheimer’s Disease
उम्र — 26
स्थिति — प्रगति पर

“तृषा… धीरे-धीरे अपनी यादें खो रही है।”


💔 तृषा का अकेलापन

तृषा को सब पता था।

वो जानती थी कि उसका आज धीरे-धीरे फिसल रहा है…
और एक दिन वो शायद नील का नाम भी भूल जाएगी।

इसलिए उसने नील से दूरी बनानी शुरू कर दी।

“नील… मैं सोच रही हूं कुछ दिनों के लिए अकेले कहीं चली जाऊं…”

नील बोला —

“तृषा, तुम ठीक तो हो न?”

वो मुस्कुराई —

“बस खुद से मिलना है…”


🌙 अंधेरी रात

उस रात नील ने एक अधूरा गाना कंपोज़ किया।

उसकी पंक्तियाँ थीं:

“तू भूल भी जाए मुझे,
मैं फिर भी तुझे याद करूंगा…
तेरा नाम मेरी सांसों में है,
चाहे तू मुझे बेनाम कह दे…”

और उसने पहली बार खुद से कहा —

“अगर ये प्यार है…
तो मैं इसे हर भूल के साथ निभाऊंगा।”

📝 अध्याय 7: भूली पहचानें, बेनाम रिश्ता

“कभी-कभी सबसे दर्दनाक बात ये नहीं होती कि कोई चला गया…
बल्कि ये कि वो पास होते हुए भी, तुम्हें पहचानता नहीं।”


🧠 पहचान की दरार

तृषा और नील एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में थे — नए एल्बम “तुम जो हो” के लॉन्च पर।

फ्लैश कैमरे, रिपोर्टर्स, शोर…

तृषा थोड़ी असहज थी, जैसे माहौल उससे दूर होता जा रहा हो।

एक रिपोर्टर ने नील से पूछा:

“आपके और तृषा के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा है… क्या आप दोनों साथ हैं?”

नील मुस्कराया और तृषा की ओर देखा।

लेकिन तृषा अजीब ढंग से रिपोर्टर की ओर मुड़ी और बोली—

“माफ़ कीजिए, मैं सिर्फ गाने लिखती हूं। निजी रिश्तों के बारे में नहीं बोलती…”

नील का चेहरा उतर गया।


💔 भूलने की शुरुआत

घर लौटने पर नील ने उससे पूछा—

“तृषा… तुम मुझे अब पहचानती हो न?”

वो चुप रही।

“हम… साथ हैं न?”

वो उठकर बालकनी में चली गई। कुछ देर बाद धीमे से बोली—

“कभी-कभी लगता है… हम बस अच्छे कलीग्स हैं।”

नील का दिल जैसे फर्श पर गिर पड़ा।


🕳️ विवान की वापसी

अगले दिन नील ने तृषा को एक कॉफी शॉप के बाहर खड़ा देखा… किसी का इंतज़ार करती हुई।

कुछ ही देर में विवान सेन कार से उतरा — वही, जिसने तृषा को शादी के दिन छोड़ दिया था।

वो दोनों बातें कर रहे थे, और तृषा… हँस रही थी

नील ने पहली बार किसी और के साथ तृषा को हँसते देखा।
पर वो हँसी अजनबी सी लगी।


🎭 विवान का इरादा

विवान जान चुका था तृषा की स्थिति।

“मैं जानता हूं तुम सब भूल रही हो… लेकिन याद रखना, मैं ही था जो तुम्हारे साथ सबसे पहले था।”

तृषा कन्फ्यूज़ दिख रही थी।

“तुम… तुम वही हो न… जिसने मुझे छोड़ दिया था?”

विवान ने मुस्कुरा कर उसका हाथ थामा—

“मैं वही हूं… लेकिन शायद इस बार तुम्हें मुझसे प्यार हो जाएगा।”


💣 सबसे गहरा वार

एक शाम नील, तृषा को स्टूडियो में बुलाता है।

वो अपने नए गाने की रिकॉर्डिंग करवाना चाहता है —
गाना था “तेरा नाम नहीं भूला”

गाना खत्म हुआ। नील ने भावुक होकर कहा—

“तृषा, तुम्हें याद है न, ये गाना हमने कैसे बनाया था?”

तृषा थोड़ी देर तक उसे देखती रही, फिर धीरे से बोली—

“महेश… तुम सच में अच्छा गाते हो।”

नील को जैसे किसी ने भीतर से तोड़ दिया।

“महेश नहीं… मैं नील हूं, तृषा… नील।”

तृषा का चेहरा खाली था —
वो सचमुच भूल चुकी थी।


📓 अकेलेपन की रात

उस रात नील ने अकेले गिटार उठाया और वही पुराना गाना बजाया जो उन्होंने साथ शुरू किया था।

लेकिन अब शब्दों का कोई मतलब नहीं था।
सिर्फ एक खाली सुर था… जो तृषा के नाम पर रो रहा था।

📝 अध्याय 8: सायरा — एक आखिरी गीत

“जब शब्द खो जाएं, तो एक गीत सब कह देता है…”


🖋️ सायरा की शुरुआत

तृषा एक दिन अकेले स्टूडियो में पहुंची।

उसने नील की डायरी उठाई… और पन्नों को उलटते हुए अपने खोए पलों को तलाशने लगी।

एक पन्ने पर कुछ अधूरी पंक्तियाँ थीं—

“जब तू मेरा नाम भी न जाने…
तब भी मैं तुझे गीतों में तलाशूं…”

वो पंक्तियाँ पढ़ते ही उसकी आँखें नम हो गईं।

उसी डायरी में उसने पहली बार खुद कुछ लिखा — एक पूरा गाना।
गाने का नाम रखा: “सायरा”


🎙️ गाने की रिकॉर्डिंग

उसने अपनी कंपकंपाती आवाज़ में वो गाना रिकॉर्ड किया।

पंक्तियाँ थीं:

“मैं हूँ सायरा…
यादों की छांव में पलती एक रेखा,
जो हर गीत में तेरा नाम ढूंढती है…
भले तू मुझे भूल जाए,
मैं तुझे हर सुर में जीती रहूंगी।”

रिकॉर्डिंग के बाद वो सिर्फ एक लाइन स्टूडियो की टेबल पर छोड़ गई —

“जब मैं तुम्हें भूल जाऊं… तब ये गाना मुझे सुना देना।”


📦 तृषा की गुमशुदगी

अगली सुबह नील स्टूडियो पहुंचा।

स्टाफ ने बताया —
“तृषा सुबह आई थी, लेकिन फिर अचानक चली गई… अपना फोन भी यहीं छोड़ गई है।”

टेबल पर डायरी थी, और एक रिकॉर्डिंग फाइल: “Saira_Final.mp3”

नील ने गाना चलाया…
और उसके शब्दों में तृषा की आत्मा महसूस हुई।


🕵️ नील की तलाश

उसके बाद नील पागलों की तरह उसे ढूंढने लगा।

रेलवे स्टेशन, पुराना घर, अस्पताल, यहां तक कि विवान तक गया।

लेकिन तृषा जैसे हवा में घुल गई थी।


💔 एक आखिरी सुर

एक रात नील ने रेडियो पर सायरा का गाना चलवाया।

रात 11 बजे।

वो जानता था — अगर तृषा कहीं होगी… वो ये सुर पहचानेगी।

गाना खत्म होने से पहले… रेडियो स्टेशन पर एक कॉल आया।

एक धीमी सी आवाज़…

“क्या आप… वो गाना फिर से चला सकते हैं?
उसमें… मेरा नाम था शायद…”

नील ने पहचान लिया।

तृषा मिल गई थी।

📝 अध्याय 9: नील के नाम एक खत

“कुछ यादें लफ्ज़ों से नहीं, एहसास से लिखी जाती हैं…”


🌙 तृषा का अकेलापन

हिमाचल के एक शांत आश्रम में, एक छोटी सी खिड़की के पास बैठी तृषा, धीरे-धीरे पन्नों को पलट रही थी। उसके पास नाम, चेहरे, तारीखें… सब धुंधले हो चुके थे।
पर किसी एक शख्स की छाया अब भी उसके दिल के कोने में थी।

कभी-कभी वह खुद से पूछती—

“क्या कोई मुझे अब भी याद करता है?
क्या मैं किसी की धड़कनों में अब भी ज़िंदा हूँ?”


✍️ खत की शुरुआत

आश्रम की देखभाल करने वाली बहन सुमति ने उसे एक डायरी दी।

तृषा ने उसमें लिखना शुरू किया —

“प्रिय नील,
शायद जब तुम यह खत पढ़ो, मैं वो तृषा नहीं रहूंगी जिसे तुम जानते हो।
शायद मैं तुम्हारा नाम भी न पहचानूं, लेकिन एक एहसास है… जो मुझे तुम तक खींचता है।
एक गीत की तरह… जो भुला नहीं जा सकता।”


💔 यादों की परछाइयाँ

तृषा ने लिखा:

“मुझे याद नहीं कि तुम कैसे दिखते हो,
लेकिन जब मैं सायरा सुनती हूँ,
मेरे दिल की एक नस हल्की सी थरथराने लगती है।
क्या तुम वही हो?
जिसकी आंखों में मैं कभी खुद को पढ़ा करती थी?”


😢 अस्वीकृति और डर

“अगर मैं कभी तुम्हें मिलूं और तुम्हें पहचान न सकूं,
तो माफ कर देना।
मेरी बीमारी ने मेरी यादों को नहीं, मेरी आत्मा को भी छू लिया है।”

“लेकिन अगर तुम मुझे पहचानो…
तो बस इतना कहना —
‘सायरा अभी भी गा रही है।’
शायद मैं मुस्कुरा दूं।”


💌 खत का अंत

“नील,
अगर कभी यह खत तुम्हारे हाथों तक पहुंचे,
तो जान लो —
मैं तुम्हें हमेशा चाहती रही…
याद रहूं या न रहूं।

सायरा
(तृषा — कभी तुम्हारी गीतकार)”


📬 खत का मिलना

यह खत सुमति बहन ने नील को भेजा — जब उसने रेडियो पर सायरा की आवाज़ सुनी थी।

नील ने खत को बार-बार पढ़ा।

उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

🌄 अध्याय 10: वापसी

“प्यार अगर सच्चा हो, तो वो रास्ता खुद बना लेता है…”


🧳 नील की तलाश

“सायरा” गाना जब दुनियाभर में वायरल हुआ,
नील को अचानक एक वीडियो क्लिप में हिमाचल के आश्रम में बैठी तृषा की हल्की झलक मिली।

उसे किसी सबूत की ज़रूरत नहीं थी।
उस एक पल में उसने तय कर लिया—

“अब मैं सिर्फ उसे वापस पाऊंगा। चाहे जैसे भी।”


🚗 यात्रा का संघर्ष

सर्द हवाओं और मुश्किल पहाड़ी रास्तों के बीच नील, अपने गिटार और तृषा की डायरी के साथ निकला।

हर मोड़ पर उसके मन में एक ही सवाल था—

“क्या वो मुझे याद करेगी?”


🏡 आश्रम में पहली मुलाकात

वो शाम की आरती का वक्त था।
नील ने दूर से देखा — सफेद दुपट्टे में बैठी एक लड़की, कुछ बच्चों के साथ मुस्कुरा रही थी।

तृषा थी वो।

नील की सांसें रुक सी गईं।


💔 पहचान का दर्द

नील उसके पास गया:

“तृषा?”

वो मुस्कराई, पर पहचाना नहीं।

“आप कौन हैं?”

उस एक वाक्य ने नील का दिल चीर दिया।


🎵 संगीत की वापसी

नील ने कुछ नहीं कहा।
बस गिटार उठाया… और “सायरा” की शुरुआती धुन बजाई।

तृषा कुछ पल चुप रही…
फिर उसकी आंखों में हलचल हुई।

“ये… धुन… मैंने… कही सुनी है…”


🌧️ यादों की बूँदें

हर दिन नील आश्रम में आता,
हर दिन वही धुन बजाता,
हर दिन तृषा से उनकी यादों की कहानी दोहराता।

धीरे-धीरे…
उसकी आंखों में चमक लौटने लगी।


🕯️ वो पल जब सब बदल गया

एक शाम…
सायरा की धुन पर नील गा रहा था।

तृषा उसकी ओर देखती रही…
फिर अचानक बोली:

“नील…”

नील की आंखों से आंसू बह निकले।

“तुम्हें याद है?”

“थोड़ा… लेकिन दिल कहता है — तुम मेरे हो…”


💍 एक प्रस्ताव, एक वादा

नील ने घुटनों पर बैठकर पूछा:

“क्या तुम दोबारा मेरी बनोगी?”

तृषा मुस्कराई…

“अगर मैं भूल भी जाऊं,
तो क्या तुम हर दिन मुझे फिर से प्यार करोगे?”

नील ने जवाब दिया:

“हर सुबह तुम्हें दोबारा अपना बनाऊंगा…
जब तक संगीत बजता रहेगा।”

🎤 अध्याय 11: “सायरा लाइव” — वेम्बली स्टेडियम की वो रात

“प्यार जब मंच पर उतरता है, तो सिर्फ गीत नहीं… यादें गूंजती हैं।”


🌍 दुनियाभर में हलचल

“सायरा” गाने की लोकप्रियता ने नील को दुनिया का सबसे बड़ा म्यूज़िक आइकन बना दिया था।
और अब उसे मिला था आमंत्रण—
लंदन के वेम्बली स्टेडियम में एक भव्य लाइव परफॉर्मेंस का।

नील ने एक शर्त रखी—

“मैं इस मंच पर तभी गाऊंगा,
जब वो मेरी सायरा मेरे साथ होगी।”


💌 तृषा का साथ

तृषा, अब भी पूरी तरह ठीक नहीं थी।
कभी-कभी यादें धुंधली हो जातीं,
कभी गुमनाम चेहरों से डर जाती थी।

पर नील का प्यार — हर रोज़ उसे मजबूत बनाता रहा।

वो भी तैयार हो गई…

“अगर मैं भूल भी जाऊं,
तो भी मंच पर तुम्हारे साथ खड़ी रहूंगी।”


🎶 वेबसाइट स्टेडियम का दृश्य

लाखों लोगों की भीड़…
हज़ारों लाइट्स…
धड़कनें तेज़…

नील गिटार उठाता है,
मंच पर तृषा उसके साथ खड़ी होती है — एक साधारण सलवार सूट में, आँखों में डर और दिल में विश्वास।

नील माइक पर आता है:

“यह गाना उस लड़की के लिए है,
जिसने मुझे संगीत, प्यार और जीवन का मतलब सिखाया…”

सायरा शुरू होता है।


🫀 यादों की वापसी

गाने के बीच में…
तृषा अचानक भावुक हो उठती है।

उसकी आँखें बंद होती हैं…
और जब वो खुलती हैं,
तो वो नील को देखती है — पूरे होश और प्यार के साथ।

“नील… मुझे सब याद है!”
“हमारा कॉफी शॉप… वो पहली कविता… वो झील का किनारा…”

नील गाते-गाते रोने लगता है।
भीड़ तालियों से गूंज उठती है।


💞 आखिरी सीन: साथ का वादा

परफॉर्मेंस के बाद, नील घुटनों पर बैठकर एक असली अंगूठी निकालता है।

“क्या अब तुम मेरी सिर्फ प्रेमिका नहीं,
मेरी बीवी बनना चाहोगी?”

तृषा मुस्कराती है, आंसुओं के बीच जवाब देती है:

“हाँ! हर उस दिन के लिए,
जब मैं तुम्हें फिर से पहचानूंगी।”

स्टेडियम ताली और चीखों से गूंज उठता है।


🎬 The End: एक गीत, जो कभी नहीं भूलेगा

“कभी-कभी ज़िन्दगी एक धुन बन जाती है,
जो सिर्फ दो दिलों की ताल पर चलती है।”

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