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मां ने 15 दिन के नवजात को फ्रिज में रखा

मां ने 15 दिन के नवजात को फ्रिज में रखा

यूपी के मुरादाबाद में दिल दहला देने वाली घटना: मां ने 15 दिन के नवजात को फ्रिज में रखा, परिवार और समाज स्तब्ध

मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर दिया। यहां एक महिला ने अपने महज़ 15 दिन के नवजात बेटे को फ्रिज में रख दिया। बच्चा रो रहा था और मां ने सोने के लिए ऐसा कदम उठाया। सौभाग्य से बच्चे की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके और समाज को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है।


कैसे हुआ खुलासा?

घटना रात की बताई जा रही है। बच्चे की मां उसे कमरे से बाहर ले गई और थोड़ी देर बाद सोने चली गई। जब घर में मौजूद दादी को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, तो उन्हें अजीब लगा। उन्होंने आवाज का पीछा करते हुए किचन का दरवाजा खोला।

फिर जो नज़ारा सामने आया, उसे देखकर उनके होश उड़ गए—
फ्रिज के अंदर उनका मासूम पोता रखा हुआ था!

घबराकर उन्होंने तुरंत बच्चे को बाहर निकाला और परिवार के साथ अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टरों ने बच्चे को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया। सौभाग्य से बच्चे की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।


मां का चौंकाने वाला बयान

जब परिजनों ने बच्चे की मां से पूछा कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया, तो उसका जवाब और भी हैरान करने वाला था।
उसने कहा:
👉 “बच्चा बार-बार रो रहा था और सो नहीं रहा था। मुझे समझ नहीं आया कि क्या करूँ। इसलिए मैंने उसे फ्रिज में रख दिया और खुद सोने चली गई।”

यह जवाब सुनकर परिवार सन्न रह गया। किसी भी मां से उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपने नवजात को इस तरह खतरे में डाल दे।


पुलिस और प्रशासन हरकत में

परिवार ने तुरंत इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस ने बच्चे की सुरक्षा को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।

  • पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मां की मानसिक स्थिति क्या है।
  • क्या वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रही है?
  • या फिर इसके पीछे कोई और कारण, जैसे तनाव, घरेलू कलह या लापरवाही, मौजूद है?

प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चे की सुरक्षा और आगे की कार्रवाई पर नज़र बनाए रखी है।


डॉक्टरों की राय: मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी खतरनाक

चिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद महिलाओं को कई बार मानसिक और शारीरिक बदलावों से गुजरना पड़ता है।

  • कुछ मामलों में महिलाओं को पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है, जिसमें वे चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद न आना और बच्चे से दूरी जैसे लक्षण दिखाती हैं।
  • अगर समय पर इलाज न मिले तो हालात खतरनाक हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना समाज को यह सिखाती है कि मातृत्व सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी मांग करता है।


पड़ोसियों और समाज की प्रतिक्रिया

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई।

  • पड़ोसियों का कहना है कि महिला पहले से ही तनाव में रहती थी और बच्चे के जन्म के बाद और भी ज्यादा अकेली हो गई थी।
  • कुछ लोगों ने इसे लापरवाही बताया, तो कुछ ने कहा कि शायद महिला मानसिक रूप से अस्थिर थी।

हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है:
👉 “आखिर कोई मां ऐसा कैसे कर सकती है?”


समाज के लिए सबक

यह घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा और मां की मानसिक सेहत को लेकर जागरूक रहना बेहद जरूरी है।

  • अगर घर में नई मां को तनाव या परेशानी महसूस हो रही हो, तो परिवार को उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
  • नवजात की देखभाल के दौरान मदद और सहयोग बेहद जरूरी है।
  • मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

हमारी संवेदनाएं

हमारी संवेदनाएं उस मासूम बच्चे और उसके परिवार के साथ हैं। यह राहत की बात है कि बच्चा सुरक्षित है, लेकिन यह घटना समाज को एक गहरी सीख देती है—
👉 मातृत्व और बचपन दोनों की रक्षा तभी संभव है जब परिवार, समाज और प्रशासन मिलकर संवेदनशीलता और जागरूकता से काम करें।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

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